STD क्या है? STD का Full Form क्या होता है?

STD Full Form In Hindi – आज के समय में कई बीमारियाँ लोगों को घेरे हुए हैं उनमें से ही एक है STD। यह सम्भोग से सम्बंधित एक बीमारी है जिसके बारे में आज हम जानेंगे। वैसे तो आप सभी ने इसके बारे में सुना ही होगा लेकिन इसके बारे में आज हम आपको व्यापक जानकारी देंगे, जिससे आप इस बीमारी को भांप सके, यह क्या है इसे समझ सकें और इसका इलाज करवा सकें। बीमारी चाहे कोई भी हो उसे समय पर रोकना बहुत ही जरुरी होता है साथ ही उससे बचना भी बहुत ही जरुरी होता है।

STD क्या है STD का Full Form क्या है?

what is the full form of std

STD एक यौन संबंधित बीमारी है और STD का Full Form है “Sexual Transmitted Diseases” जिसे हिन्दी मे “सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिसीज” के नाम से जानते है यह बीमारी यौन संबंधित बीमारी है जो कि आमतौर पर सेक्स द्वारा विशेष रूप से योनि संभोग,  गुदा सेक्स या मौखिक सेक्स द्वारा फैलती है। 30 से अधिक विभिन्न प्रकार के व्यक्ति या वायरस और परजीवी इस बीमारी का कारण बनते हैं।

STD के अन्य Full Form

STD को “Subscriber Trunk Dialling” के नाम से भी जाना जाता है जिसका उपयोग कॉल करते समय किया जाता है।

क्या STD का इलाज संभव है?

क्या इस बीमारी का इलाज संभव है? और अगर संभव है तो इस बीमारी का इलाज कैसे किया जाता है, यह सवाल लोगों के जहाँ मैं हमेशा रहता है। कुछ हद तक इस बीमारी का इलाज संभव है इस बीमारी का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं के द्वारा किया जाता है। इनमें कुछ बीमारियाँ ऐसी हैं जिन्हें ठीक तो नहीं किया जा सकता लेकिन कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है जैसे एचआईवी ठीक नहीं किया जा सकता लेकिन तरीकों से कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। अगर बीमारी की प्रारंभिक अवस्था में ही पता लग जाए तो आमतौर पर संक्रमण के 1 वर्ष के भीतर बहुत हद तक इस बीमारी की रोकथाम की जा सकती है और बचाव की संभावना होती है लेकिन अधिक समय बीत जाने पर इलाज होना संभव नहीं हो पाता।

STD के लक्षण क्या है?

सभी STD बीमारियों में लक्षण दिखाई नहीं देते इसलिए उपचार कभी-कभी देरी से होता है। लेकिन कुछ लक्षणों से पता लगाया जा सकता है जैसे भूख न लगना, उल्टी आना, मूत्र आंखों और त्वचा के पीले रंग से लक्षणों का पता लग जाता है। जननांगों पर छोटे छोटे लाल दाने निकल आते हैं जांघों, उंगलियों पर भी दाने निकल आते हैं। असामान्य योनिस्त्राव होता है सफेद पानी की समस्या बढ़ जाती है। पेशाब के दौरान जलन का अनुभव होना, लगातार पेशाब होना यह लिंग और योनि के आसपास दर्द होना और गंध आना। अगर उपरोक्त में से कोई भी लक्षण आपको दिखाई देते हैं तो ऐसे में डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए क्योंकि यह सारे STD के लक्षण हो सकते हैं।

इस बीमारी के क्या दुष्प्रभाव है?

इस बीमारी के उपचार में जो दवाइयाँ दी जाती हैं वे दवाइयाँ अपने कई सारे साइड इफेक्ट छोड़ती हैं जैसे त्वचा में खुजली लाली और सूजन। इस बीमारी में कुछ ऐसे रोगाणु भी होते हैं जो कैंसर के विकास का कारण बनते हैं। हेपेटाइटिस बी और एचआईवी जैसे कुछ संक्रमण गंभीर बीमारी का कारण बनते हैं परिणाम स्वरूप मृत्यु भी हो सकती है। क्लैमीडिया के लिए जो दवाएं दी जाती हैं उनसे उल्टी आना, पेट दर्द होना, ऐठन होना, योनि में खुजली होना आदि समस्याएँ होती है। इस बीमारी को दूर करने के लिए जिन दवाओं का प्रयोग किया जाता है उसके दुष्प्रभाव हैं। अति संवेदनशीलता, अति प्रतिक्रिया, एनीमिया, दस्त, पेट दर्द, न्यूरोपैथी, दांत का दर्द, अनिद्रा, थकान भूखी की कमी इत्यादि ।

उपचार के बाद क्या सावधानियां रखनी चाहिए?

उपचार के दौरान और उपचार के बाद भी रोगियों को बहुत विशेष ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि यह कोई साधारण बीमारी नहीं है। रोगियों को अपनी दवा का कोर्स पूरा करना चाहिए और जब तक डॉक्टर कहें तब तक इसको जारी रखना चाहिए। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रोगियों के ऊपर दबाव का असर हो भी रहा है या नहीं। यदि सेक्स की जरूरत है तो योन भागीदारों को भी परीक्षण कराया जाना चाहिए और सुरक्षित यौन संबंध बने।

कितने समय में एक संक्रमित व्यक्ति का पूर्ण उपचार हो जाता है?

HIV इलाज के योग्य नहीं है। लेकिन उपचार से रोगी के जीवन को बढ़ाया जा सकता है। लेकिन STD कईलाज कुछ हद तक संभव है। रोगी को जो STD इलाज के योग्य नहीं है लेकिन उपचार से रोगी के जीवन को बढ़ाया जा सकता है । अगर इलाज जल्दी होता है तो यह प्रभावी हो सकता है अन्यथा उपचार में लंबा समय लग सकता है। दवाएं और उपचार बीमारी के संक्रमण को बढ़ने से रोक सकती हैं दर्द को कम कर सकती हैं और रोग से होने वाली परेशानियों से रोगी को बचा सकते हैं लेकिन पूर्ण रूप से निजात पाना संभव नहीं है।

क्या भारत में इस बीमारी का इलाज है?

भारत में इस बीमारी को पूर्ण रूप से ठीक करने का कोई उपचार नहीं है भारत में केवल वही दवाइयाँ उपलब्ध हैं जिनसे केवल इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है लेकिन खत्म नहीं किया जा सकता ।

इस बीमारी के इलाज में कितना खर्च होता है?

इस बीमारी का खर्च डॉक्टर की फीस और STD के प्रकार पर निर्भर होता है कि रोगी उससे कितना प्रभावित है। बीमारी का चरण क्या है और किसी विशेष रोगी के लिए चुनी गई दवाएं क्या है। बहुत कम लागत वाले STD के जाँच पैकेज भी उपलब्ध हैं कुछ उपचार के लिए अलग-अलग विधियाँ भी लिए उपलब्ध हैं। कौन सी विधि उपयोग की जा रही है उस विधि पर इस बीमारी के उपचार का खर्च निर्भर करता है ।

क्या इस बीमारी का उपचार स्थाई है?

नहीं इस बीमारी का उपचार स्थाई नहीं है क्योंकि संक्रमण वापस आ सकता है या इलाज के साथ-साथ लक्षण या संक्रमण गायब भी हो सकते हैं। सावधानी न रखी जाए तो फिर से संक्रमित होने की बहुत ज्यादा सम्भावना होती हैं।

इस बीमारी के उपचार के क्या कोई दूसरे भी विकल्प उपलब्ध है?

जी हाँ इस बीमारी के कई और विकल्प भी उपलब्ध है जैसे घरेलू उपचारों में इचीनेसिया की अत्यधिक सराहना की जाती है। क्योंकि इस जड़ी बूटी का इस्तेमाल STD सहित कई अन्य यौन संक्रमण बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। क्योंकि यह हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है और शरीर में हार्मोन स्त्राव को उत्तेजित करती है।

लहसुन STD के जोखिम को कम कर सकता है क्योंकि लहसुन से रोगप्रतिरोधक क्षमता अधिक बड जाती है और इस प्रकार की परेशानी से निजात और आराम मिलता है। इसलिए अगर लहसुन का इस्तेमाल किया जाता है तो प्रभावी ढंग से पूरे शरीर का तंत्र शुद्ध हो जाता है।

  • दही अपने प्राकृतिक गुणों के लिए बहुत अच्छी तरीके से जाना जाता है। यह पूरे शरीर में संक्रमण को रोकता है।
  • इसके अलावा एक बहुत ही साधारण सा घरेलू उपचार है नींबू का रस जो कि STD से जुड़े दर्द को कम कर देता है।
  • इसी प्रकार नीम के पत्ते, क्रेन बेरी का रस आदि का इस्तेमाल करके STD के खतरों को कम किया जा सकता है।

STD बहुत ही भयानक बीमारी है, इसके साथ-साथ इसका उपचार भी बहुत ही मुश्किल है और बहुत ही महंगा भी है। इसलिए इसकी रोकथाम का सबसे अच्छा उपाय है कि यौन संबंधों में सावधानी बरती जाए। और अगर थोड़े भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह ली जाये। क्योंकि प्रारंभिक लक्षणों के देखते ही इसका इलाज होना संभव है लेकिन अधिक समय बीतने पर इसका इलाज भी संभव नहीं है और दूसरे लोगों पर इसके संक्रमण का खतरा भी बढ़ता जाता है।

युवाओं पर STD का खतरा

आज कल के युवाओं पर STD का खतरा बहुत ही अधिक होता है कई जाँच केंद्रों ने इसका खुलासा किया है। सरकार STD से बचने के लिए कई प्रकार के शिविर भी चला रही है और कई रुपयों की राशि इसके लिए सरकार ने खर्च की है और अभी भी खर्च कर यही है। सबसे ज्यादा इसका खतरा युवाओं में ही है इसलिए युवाओं को इसके प्रति सचेत रहना बहुत ही आवश्यक है।

युवा रहे STD के प्रति सचेत

आज के समय में STD जैसी बिमारियों के लिए युवाओं को सचेत रहने की बहुत अधिक आवश्यकता है। STD का सबसे बड़ा कारण है असुरक्षित सम्भोग। जिसके बारे में युवाओं को कम जानकारी होती है, और इसी वजह से युवा इस बीमारी के प्रकोप में आ जाते हैं। अभी के आंकड़ों के अनुसार 25 वर्ष की आयु के युवाओं में इसका खतरा बहुत तेजी से बढ़ता दिखाई दिया है। जितने भी मामले सामने आये हैं उन सभी में हर्पीज (दाद), क्लैमाइडिया (जननांग रोग)और जेनिटल वार्ट (जननांग मस्सा) जैसे इंफेक्शन भी सामने आये हैं।

25 साल की उम्र वाले हर दूसरे या फिर तीसरे व्यक्ति में क्लैमाइडिया देखने को मिल रहा है। लेकिन इलाज के बाद कम से कम 50 प्रतिशत लोगों को फायदा भी हुआ है।

STD को ठीक होने में लगने वाला समय

कई बार जब व्यक्ति STD या सेक्स सम्बन्धी बीमारी से प्रभावित होता है तो उसके मन में एक सवाल बार-बार उठता है कि कब ये बीमारी ख़त्म होगी और पूरी तरह से ख़त्म होगी या नहीं। और यह सोचने वाली बात भी है क्योंकि यह व्यक्ति के पूरे जीवन को प्रभावित कर देती है। लेकिन कुछ बिमारियों का इलाज संभव नहीं है जैसे एचआईवी। लेकिन रोगी का जीवन थोड़ा बढ़ सकता है।

जबकि हेपेटाइटिस बी का इलाज संभव है और इससे प्रभावित व्यक्ति के ठीक होने की सम्भावना होती है। लेकिन अगर इसका इलाज जल्दी किया जाये तो ही इससे बचना संभव है अगर ऐसा नहीं किया गया तो ठीक होना संभव भी है और असंभव भी। यह एक ऐसा संक्रमण है जो अन्य में भी फ़ैल सकता है इसलिए इन्हें दूसरों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

महिलाओं को है STD का अधिक खतरा

अमेरिका की एक रिपोर्ट के अनुसार यह बात सामने आयी है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को STD का खतरा ज्यादा बना हुआ है। महिलाएँ इससे अधिक प्रभावित हो रही हैं। महिलाओं के गुप्तांग ज्यादा नाजुक और पतले होते हैं जिस वजह से बैक्टीरिया और वायरस का उनके अंदर आसानी से जाना संभव होता है। और ये कारण होता है कि उनमें STD जैसे रोग बहुत ही जल्दी पनपते हैं और उन्हें प्रभावित करते हैं।

  • अगर सम्भोग के समय सावधानी बरती जाये तो इस प्रकार के रोगों से बचा जा सकता है। जी हाँ सावधानी कई प्रकार से बरती जा सकती है जैसे:
  • ओरल सेक्स न करें। अगर आपका पार्टनर आपके मन करने के बाद भी ओरल सेक्स करना चाहता है तो गुप्तांगों को अच्छी तरह धो लें।
  • कंडोम का हमेशा प्रयोग करें।
  • ध्यान रखें कि कहीं आपके गुप्तांगों से किसी प्रकार का खून तो नहीं आ रहा है।
  • गुप्तांगों में किसी प्रकार का इंफेक्शन या चोट तो नहीं है।
  • टॉयलेट शीट हमेशा साफ़ करके प्रयोग करें।

इन सभी बातों का आपको विशेष ध्यान रखना होता है। इन सभी का ध्यान रखकर आप STD जैसे रोगों से बचाव कर सकते हैं लेकिन अगर आप STD का शिकार हो चुकें हैं तो इसका इलाज तो आपको करवाना ही होगा तभी जाकर आप इस बीमारी से दूर हो पाएंगे।

महिलाओं को कुछ परेशानियों को गंभीर रूप से लेना चाहिए

महिलाओं की एक सामान्य आदत होती है कि अगर उन्हें कोई भी शारीरिक परेशानी है तो वे उसे गंभीर रूप से नहीं लेती। कभी-कभी ऐसा होता है कि अगर कुछ चीज़ें ऐसे ही सामन्य रूप से लेने के कारण बड़ी हो जाती है जिसका भुगतान बाद में करना होता है। उदहारण के लिए जब कभी भी महिलाओं को यूरिन करते समय जलन होती है तो वे से सामान्य परेशानी समझ लेती हैं लेकिन ये भी STD का एक लक्षण ही होता है। हो सकता है यह क्लैमाइडिया हो।

क्लैमाइडिया

क्लैमाइडिया एक ऐसी बीमारी या संक्रमण है जो महिलाओं के प्रजनन इंद्रियों को क्षतिग्रस्त कर देता है और इससे बचना बहुत ही ज्यादा जरुरी है। यह आज के समय में महिलों में अधिक देखने को मिल रहा है। ये कई चीज़ें जिनसे बचाव होना चाहिए।

STD और HIV के लक्षण को पहचान कर इन संक्रमण से स्वयं का बचाव करना बहुत ही ज्यादा जरुरी है. इसलिए समय रहते इनके लक्षण को पहचाने इनकी जाँच करवाएँ और इनका इलाज भी करवाएँ।

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