NABARD Full Form In Hindi – NABARD Ka Full Form Kya Hota Hai?

Nabard Full Form In Hindi – नाबार्ड क्या है, Nabard का Full Form क्या होता है, Full Form Of Nabard, सरकार द्वारा जनता के हित के लिए कई प्रकार के Development किये गए हैं। जिससे जनता को सहायता मिल सके। आज हम ऐसे ही एक Development बैंक के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसकी शुरुआत भारत सरकार द्वारा की गई है। आज हम बात करने जा रहे हैं NABARD के बारे में।

NABARD क्या है? NABARD Full Form In Hindi

what is the full form of nabard in hindi

NABARD एक बैंक है जिसकी स्थापना 12 जुलाई 1982 में की गई थी। NABARD का मुख्यालय महाराष्ट्र के मुंबई में स्थित है। यहीं से पूरे देश में NABARD का संचालन किया जाता है। NABARD भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ाने का कार्य करता है। किसान क्रेडिट कार्ड के बारे में तो सभी ने सुना होगा वह भी NABARD का ही अहम हिस्सा है। किसान क्रेडिट कार्ड को भी NABARD के द्वारा ही डिजाईन किया गया है। इससे किसानों को बहुत लाभ हुआ है एवं किसान आसानी से अब बैंक से लोन ले सकते हैं।

NABARD का पूरा नाम यानि Full Form है “National Bank for Agriculture and Rural Development” इसे हिंदी में “राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक” कहा जाता है। NABARD बैंक में हर महीने रिक्त पदों के लिए Vacancy निकलती है। जिसे इसकी Official Website के द्वारा देखा जा सकता है। अगर कोई भी NABARD से जुड़ना चाहता है तो वह NABARD का Facebook Page ज्वाइन कर सकता है वहाँ पर भी NABARD के बारे में सभी प्रकार की जानकारी होती है। इसके अलावा ट्विटर पर भी NABARD को फॉलो कर सकते हैं।

NABARD के कार्य

NABARD का Full Form तो आप जान ही गए चलिए अब इसके कार्य जानते है। NABARD ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ऋण  प्रदान करता है। ग्रामीण क्षेत्रों एवं किसानों के लिए यह बहुत अहम् बैंक है। यह ग्रामीणों एवं किसानों को उनके जीवन को सुधारने एवं आवश्यक कार्यों के लिए ऋण प्रदान करने वाली बैंक है।

NABARD के द्वारा कृषि लघु उद्योग, कुटीर उद्योग, ग्रामीण सिल्क उद्योग एवं हस्थशिल्प जैसे कई उद्योगों के लिए भी ऋण  प्रदान किया जाता है। 2005-2006 में NABARD का स्वीकृत ऋण प्रवाह बढ़कर 1574800 मिलियन रुपए पहुँच गया है।

NABARD की स्थपना के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद साहूकारों की संख्या बहुत कम हो गई। ये किसान किसानों से बहुत ज्यादा ब्याज वसूलते थे लेकिन अब NABARD से किसानों को राहत की सांस मिली है। और किसानों का शोषण बंद हो गया है।

2010 तक NABARD की प्रदत्त राशि 2000 करोड़ हो गई थी। वही 2015-2016 में कृषि ऋण वितरण राशि लगभग 8.5 करोड़ रूपये थी एवं यह एक बहुत बड़ा आंकड़ा है। इससे किसानों को और ग्रामीणों को बहुत फायदा हुआ है।

NABARD के द्वारा पुनर्वास योजनाओं का निर्माण किया जाना संभव है। साथ ही इसके द्वारा ग्रामीण बैंक सहकर्मियों एवं संस्थाओं को प्रशिक्षण भी दिया जाता है। सभी सरकारी योजनाओं की निगरानी NABARD के अंतर्गत ही हैं।

कई वित्तीय योजनाओं को NABARD के द्वारा ही ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर कर्यवान्वित किया जाता है। NABARD के द्वारा राज्य सरकार, केंद्र सरकार, रिज़र्व बैंक एवं अन्य वित्तीय एजेंसियों के बीच सामंजस्य किया जाता है।

NABARD स्वयं के द्वारा जो भी वित्तीय योजनायें बनाई गई है उनकी निगरानी एवं मूल्यांकन का भी कार्य करता है।

NABARD द्वारा किसानों एवं ग्रामीणों के कल्याण के लिए कई प्रकार के कार्यक्रम चलाये जाते हैं। यहाँ किसनों को प्रशिक्षित भी किया जाता है। NABARD द्वारा रिज़र्व बैंक को ग्रामीण बैंकों के लिए सिफारिश की जाती है कि उनको लाइसेंस प्रदान किये जाये।

NABARD Self Help Group के मध्य सम्बन्ध स्थापित करता है।

NABARD विकास वाहिनी जैसे कार्यक्रमों का भी समर्थन करता है यह किसानों के हित में ही कार्य करते हैं।

NABARD के द्वारा सभी जिलों में सालाना ऋण योजनाएं बनाई जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्र के नए अनुसंधानों में कार्य करके किसानों की मदद करता है।

NABARD के द्वारा किसानों के हित के लिए समय-समय पर सहकारी बैंक एवं क्षेत्रीय बैंक की निगरानी भी की जाती है।

NABARD के द्वारा प्रमुख भारतीय फसलों की जल उत्पादकता की मैपिंग को प्रकाशित किया जाता है।

इनके अलवा भी कई कार्य हैं जो NABARD के द्वारा संचालित किये जाते हैं। यह सरकार का किसानों और ग्रामीणों के हित के लिए बहुत बड़ा कदम है। NABARD के द्वारा किसानों और ग्रामीणों को बहुत सहायता मिली है।

साझेदार संस्थाएं/ ग्राहक

  • अनुसूचित वाणिज्य बैंक
  • राज्य सरकार
  • राज्य स्वामित्व निकाय और कारपोरेशन
  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
  • राज्य सहकारी बैंक
  • जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक
  • राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक
  • अनुसूचित शहरी सहकारी बैंक
  • गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां
  • कृषक समूह और उत्पादक संगठन
  • पीपीपी मॉडल के तहत एसपीवी
  • भंडारागार आधारभूत सुविधा निधि के तहत परियोजनाओं के लिए कारपोरेट/ कंपनियां
  • वैयक्तिक उद्यम

विकासोन्मुख संस्थाएं

  • ग्रामीण वित्तीय संस्थाओं
  • एनजीओ और स्वैच्छिक एजेंसियां
  • विकास और स्वरोजगर प्रशिक्षण संस्थाएं
  • स्वयं सहायता समूह
  • ग्रामीण नवोन्मेषक
  • संयुक्त देयता समूह
  • कृषक क्लब
  • अनुसंधान संस्थाएं

शिकायत निवारण प्रक्रिया

कई बार जनता को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है तो उसके लिए भी NABARD के पास रास्ता है। इसका निवारण मुंबई में स्थित कार्यालय द्वारा किया जा सकता है जिसका नंबर है 022-26530106। सहकारी बैंकों एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के जो ग्राहक हैं वे सेवाओं से संबंधित शिकायतें इस नंबर 022-26541834 पर दर्ज क़रा सकते हैं। NABARD के पास शिकायतें इनके जन पोर्टल के द्वारा प्राप्त होती हैं। एवं उन्हें भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार 60 दिनों में निपटाना आवश्यक है।

संगठनात्मक ढांचा

जैसा कि आप सभी जान गए होंगे कि NABARD का कार्यालय मुंबई है। एवं इसके कुल 31 क्षेत्रीय कार्यालय हैं जो राजों एवं केंद्र शाशित प्रदेशों में हैं। श्रीनगर में एक कक्ष, बोलपुर, मंगलूर और लखनऊ में प्रशिक्षण संस्थान हैं। एवं जिला स्तर पर 421 जिला विकास प्रबंधक हैं। NABARD में 2650 प्रोफेशनल एवं 1415 अन्य स्टाफ है। यह डाटा 2016 के अनुसार है। NABARD पर पूर्ण रूप से भारत सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक का स्वामित्व है।  NABARD का मुख्य उद्देश्य यही है कि ग्रामीणों एवं किसानों तक आर्थिक सहायता पहुंचाई जा सके।

किसान क्रेडिट कार्ड से कितनी राशि लोन ले सकते हैं?

किसान क्रेडिट कार्ड से एक सीमा के अंतर्गत ही लोन लिया जा सकता है। इस लोन की राशि प्रस्‍तावित फसल पद्धति एवं वित्‍त के मान पर उगाई हुई फसलों पर आधारित रहती है। इस राशि में कई चीज़ों का अंदाजा लगाया जाता है जैसे: फसलोत्‍तर या घरेलू या उपभोग की आवश्यकता, फसल बीमा,  कृषि आस्‍तियों, वैयक्‍तिक दुर्घटना बीमा योजना एवं आस्‍ति बीमा के रखरखाव संबंधी खर्चे इत्यादि। प्रत्येक वर्ष में यह सीमा 10% की दर से बढ़ा दी जाती है। इस प्रकार से सीमा तय की जाती है लोन दिया जाता है। जिससे किसानों को सहूलियत हो।

डेयरी लगाने के लिए आप भी नाबार्ड से मिलती है 25% सब्सिडी

यही कोई भी व्यक्ति मिल्क डेयरी खोलना चाहता है तो उसके लिए भी NABARD द्वारा 25% सब्सिडी मिलेगी। देश में दुधारू पशुओं की वजह से रोजगार में बढोत्तरी हुई है। और इसी कारण से सरकार ने डेयरी उद्यमिता विकास योजना की शुरुआत की है। इसे DEDS के नाम से भी जाना जाता है। 2018-19 में DEDS के लिए 323 करोड़ के वजट को प्रस्तुत किया गया।

DEDS के तहत आपको 25% सब्सिडी मिलेगी। यह सब्सिडी अधिकतम 10 दुधारू पशुओं के लिए ही प्रदान की जाएगी। जो लोग अनुसूचित जाति/जनजाति में आते हैं उन्हें 33 फीसदी सब्सिडी मिलने की सम्भावना है।

एक पशु के लिए केंद्र सरकार द्वारा 17,750 रुपये की सब्सिडी प्रदान की जाती है। वहीं अनुसूचित जाति/जनजाति वाले लोगों को 23,300 रुपये प्रति पशु सब्सिडी प्रदान की जाती है।

दो पशु से भी शुरू कर सकते हैं डेयरी एवं इसमें आप दूध और दूधे से बने उत्पाद एवं उन्हें संरक्षित करने के लिए कोल्‍ड स्‍टोरेज यूनिट भी रख सकते हैं। DEDS योजना के तहत NABARD द्वारा पशु खरीदने, बछड़ा पालन, डेयरी पार्लर, वर्मी कंपोस्ट, दुग्ध शीतलन व अन्य कार्यों के लिए कई समिहों को प्राथमिकता दी जाती है।

डेयरी फार्मिंग योजना 2020

इस योजना के तहत यह साफ़ किया गया है कि इस योजना को सही प्रकार से चलाने के लिए पशुपालन के अलावा मत्स्य पालन विभाग के द्वारा भी सहयता ली जाएगी। डेयरी फार्मिंग योजना 2020 के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगार व्यक्तियों को स्वरोजगार दिया जायेगा। इसके द्वारा लोगों को फायदा होगा और वे स्वयं का व्यापार चला पाएंगे। देश में भी इस पहल से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। दूध उत्पादन से पशुओं की भी देखभाल होगी और देश में लोगों कको भरपूर मात्र में डेयरी  प्रोडक्ट मिलेंगे। इस योजना के लिए इच्छुक लाभार्थी को आवेदन करना होगा।

नाबार्ड डेयरी योजना 2020 बैंक सब्सिडी

  • डेयरी उद्यमिता विकास योजना के अंतर्गत दुग्ध उत्पाद बनाने वाली यूनिट को सब्सिडी प्रदान की जाती है।
  • इस योजना के अंतर्गत दुग्ध उत्पाद की प्रोसेसिंग के लिए उपकरण खरीदे जा सकते हैं।
  • अगर आप कोई मशीन खरीदते हैं और मान लीजिये उसकी कीमत 13.20 लाख रुपये है तो आपको इसपर 25% सब्सिडी मिल जाएगी मतलब आपको लगभग 3.30 लाख की पूंजी सरकार की तरफ से मिल जाएगी।
  • अगर कोई व्यक्ति एससी या एसटी जाति के अंतर्गत आता है तो उसे 4.40 लाख की पूंजी सरकार से प्राप्त होगी।

NABARD Dairy Yojana 2020 फार्मिंग योजना

इसमें पाँच प्रकार से योजनाओं को रखा गया है

पहली योजना

लाल सिन्धी, साहिवाल, राठी, गिर ये सभी देशी दूध देने वाली गायें या हाइब्रिड गायें एवं 10 दुधारू पशुओं जैसे भैंस। इन सभी के लिए छोटे डेयरी यूनिट की स्थापना के लिए NABARD द्वारा सहयता दी जाएगी।

दूसरी योजना

इस योजना के अंतर्गत बछिया बछड़ों के पालन, 20 बछड़ों के लिए ऊपर पार नस्ल, स्वदेशी मवेशियों और वर्गीकृत भैंसों दुधारू नस्लों का विवरण देना अनिवार्य।

तीसरी योजना

वर्मीकंपोस्ट और खाद को पशुओं की इकाई के साथ नहीं जोड़ा जायेगा। इसके लिए अलग से सब्सिडी मिलेगी।

चौथी योजना

दूध परीक्षकों, दूध निकालने की मशीनों पर खरीद, अधिक मात्रा में दूध होने पर उसे ठंडा रखने के लिए फ्रिज इन सभी के निवेश का लेखा जोखा।

पाँचवी योजना

स्वदेशी दूध उत्पादों का उत्पादन जिन भी डेयरी प्रसंस्करण के उपकरण से किया जायेगा उनके लिए खरीद का लेखा जोखा।

छठी योजना

डेयरी उत्पाद परिवहन सुविधाएँ और शीत श्रृंखला स्थापना और इसे शुरू करने के लिए देश के लोगों को लगभग 24 लाख रूपये की आवश्यकता होगी।

सातवीं योजना

दूध और दुग्ध उत्पादों के लिए शीत भंडारण सुविधा एवं इसके लिए ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को कम से कम 30 लाख रूपये की आवश्यकता होगी।

आठवीं योजना

निजी पशु चिकित्सा क्लिनिक की स्थापना एवं इसके अंतर्गत मोबाइल क्लिनिक के लिए 2.40 लाख रुपये एवं स्थिर क्लिनिक के लिए 1.80 लाख रुपये  की आवश्यकता होगी।

नवी योजना

डेयरी मार्केटिंग आउटलेट या डेयरी पार्लर और इसके लिए लगभग 56 हजार रुपये की राशि की आवश्यकता होगी।

इस प्रकार से सभी लेखा जोखा किया जायेगा और इन सभी योजनाओं से एक उत्तम प्रकार के उतपाद तो देश को मिलेंगे ही साथ ही साथ लोगों को रोजगार भी प्राप्त होगा। इसके लिए 25% तक सब्सिडी तो NABARD द्वारा प्राप्त हो जाएगी। और SC/ST के लिए इनकी सीमा 33.33% रखी गई है।

नाबार्ड एकमात्र ऐसी संस्था जिसका NPA है शून्य

जी हाँ NABARD एक ही ऐसी संस्था है जिसका NPA शून्य है। NPA का अर्थ है गैर निष्पादन अस्तियां। अलग-अलग राज्यों में NABARD द्वारा एक राशि मुहैया कराइ जाती है जिसका योगदान वहाँ की सिंचाई योजनाओं, सड़क और ग्रामीण क्षेत्रों आदि के लिए होती है। NABARD के द्वारा किसी भी गैर सरकारी संगठनों जैसे NGO को किसी प्रकार की राशि नहीं दी जाती न ही ये इनके समर्थन के लिए बनाया गया है। NABARD की हर योजना कृषि आधारित रखी गई हैं। और NABARD का हर समर्थन किसानों के लिए ही बना हुआ है। इसके द्वारा किसानों को वाकई में बहुत फायदा हुआ है। और यही देश की एक मात्र ऐसी संस्था है जिसका NPA शून्य है।

वैसे अगर देखा जाये तो अब कृषि के लिए इतने अनेक उपकरण और उत्पादक हो गए हैं कि किसानों को उत्पादन का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है। किसान गरीब होता जा रहा है। और इन सब चीज़ों को देखते हुए भी NABARD ने कृषि में होने वाली जरूरतों का बीड़ा उठाया और किसानों की सहायता की। इस प्रकार से NABARD द्वारा देश के किसानों और कई प्रकार के उद्योगों को सहायता मिल रही है।

Tips

हमे उम्मीद है आपको NABARD क्या है इसका Full Form क्या होता है आदि चीजों के बारे मे जानकारी मिल गई होगी। अगर आपको ये पोस्ट अच्छी लगी है तो इसे अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर करना नया भूले! Thanks For Reading.

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Mr. Samir HFT के Co-Author & Founder है इन्हे हमेशा से नयी चीजे सिखना और उसे लोगो के साथ शेयर करना पसंद है. अगर आपको इनके द्वारा शेयर की गई जानकारी अच्छी लगती है तो आप इन्हे Social Media पर फॉलो कर सकते है। Thank You!

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