KYC का Full Form क्या होता है?

KYC क्या है इसका Full Form क्या होता है? – आज के समय में KYC एक ऐसा शब्द है जिसे हर किसी ने सुना होगा। देश के नागरिकों को उनकी पहचान दिलाने के लिए कई प्रकार के दस्तावेज बनाये जाते हैं एवं साथ ही अब एक नयी प्रक्रिया शुरू की गयी है KYC। KYC के द्वारा किसी भी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि किसी कंपनी के द्वारा की जाती है।

जब कोई व्यक्ति किसी संस्था से कोई सेवा लेता है तो उसे KYC करवाना अनिवार्य होता है। आतंकवाद और भी कई घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने इस प्रक्रिया को शुरू किया है। KYC से व्यक्ति के देश के नागरिक होने की पहचान की जाती है और सत्यापन होने के बाद कंपनी उस व्यक्ति को कंपनी अपनी सेवाएं देना शुरू करती है।

KYC क्या है? इसका आवेदन कैसे किया जाता है? यह कितने प्रकार की होती है? इसमें क्या-क्या दस्तावेज लगते हैं? इन सभी चीज़ों की जानकारी ग्राहक को होना अनिवार्य है और इसके ही लिए यहाँ इन सभी बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।

अब KYC की पूरी प्रक्रिया को जानेंगे। KYC करवाने से पहले इन सभी बातों को जानना अनिवार्य है क्योंकि अगर सरकार कुछ भी कदम उठा रही है तो उसके पीछे की वजह और लाभ देश के नागरिकों को जानना और समझना बहुत जरुरी होता है।

विषय सूचि

केवाईसी क्या है? – Full Form Of KYC In Hindi

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किसी ग्राहक की पहचान और ग्राहक के पते को सत्यापित करने के लिए KYC का प्रयोग किया जाता है। सरकारी संस्थानों, बैंक, मोबाइल सिम इन सभी में KYC का प्रयोग किया जाता है। KYC का Full Form है “Know Your  Customer” इसे हिंदी में “अपने ग्राहक को पहचानों” कहा जाता है। आज के समय में KYC एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सभी ग्राहकों को अपना पहचान पत्र देते हुए स्वयं को सत्यापित करवाना पड़ता है। KYC के लिए कुछ दस्तावेज महत्वपूर्ण होते हैं एवं उन दस्तावेजों में ये सभी चीज़ें अनिवार्य हैं:

  • आपका नाम
  • आपके पिता का नाम,माता का नाम या पत्नी/पति का नाम
  • जन्म तारीख़
  • पूरा पता
  • मोबाइल या फ़ोन नंबर

इन सभी जानकारी के आधार पर KYC का सत्यापन किया जाता है। KYC के लिए कुछ दस्तावेज बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इन दस्तावेजों पर ऊपर दी हुई पूरी जानकारी होती है।

KYC के लिये आवश्यक डॉक्यूमेंट या दस्तावेज:

KYC का Full Form क्या होता है आप जान गए चलिए अब जानते है KYC के लिए कुछ बहुत ही जरुरी दस्तावेज, जो KYC के लिए मान्य होते हैं:

  • आधार कार्ड
  • पासपोर्ट
  • वोटर आईडी
  • पैन कार्ड
  • ड्राइविंग लाइसेंस

ये सभी दस्तावेज KYC के लिए मान्य होते हैं। लेकिन पैन कार्ड को एक फोटो आईडी प्रूफ के तौर पर लिया जाता है लेकिन KYC के लिए फोटो प्रूफ के साथ एड्रेस प्रूफ भी अनिवार्य होता है।

KYC का महत्व:

बैंको और वित्तीय संस्थाओं में KYC बहुत ही महत्वपूर्ण है। KYC के द्वारा व्यक्ति के आवेदन के साथ व्यक्ति की पहचान होती है। और इसके द्वारा संस्था आश्‍वस्त हो जाते हैं कि जो दस्तावेज दिए गए हैं वे वास्तविक हैं। और इससे ये भी सुनिश्चित हो जाता है कि आवेदक ने पहले कोई धोखाघड़ी तो नहीं की है। KYC के बाद ग्राहक या आवेदक की धोखाघड़ी की सम्भावना कम हो जाती है और आगे भी ऐसा होने से रोका जा सकता है।

RBI द्वारा KYC नॉर्म्स:

नए बैंक खातों के लिए RBI द्वारा वर्ष 2002 में KYC को अनिवार्य किया था। लेकिन यह 1 जुलाई 2005 से लागू किया गया था। KYC को मनी लॉन्ड्रिंग को प्रतिबंधित करने एवं आतंकवादी वित्तपोषण को रोकने के उद्देश्य से इस नॉर्म को अनिवार्य किया गया था। वर्ष 2002 में KYC के दिशा निर्देशों को पेश किया गया लेकिन उस समय उनका उचित कार्यान्वयन संभव नहीं था। इसके साथ ही RBI ने अपने सभी बैंक खातों के लिए कुछ निर्देशित उपाय अपनाने को कहा।

KYC के प्रकार:

KYC के सामान्यतः दो भाग होते हैं:

  • पहले भाग के अन्तर्गत निवेशक के बुनियादी और समरूप KYC विवरण की जानकारी दर्ज कराई जाती है। यह सेंट्रल KYC रजिस्ट्री के द्वारा निर्धारित किया जाता है। इसे यूनिफार्म KYC भी कहा जाता है। इस भाग को सभी पंजीकृत वित्तीय मध्यवर्ती संस्थाएँ उपयोग करती हैं।
  • दूसरे भाग में अतिरिक्त KYC की जानकारी दी जाती है। इसकी माँग वित्तीय संस्थाएँ करती हैं जैसे: स्टॉक ब्रोकर, म्यूच्यूअल फंड, डिपाजिटरी भागीदार इत्यादि।

क्या 18 साल से कम उम्र के लोगों का KYC किया जा सकता है?

यह विचार योग्य प्रश्न है कि क्या 18 साल से कम उम्र के लोगों का KYC किया जा सकता है? तो अभी ऐसी कोई सुविधा नहीं है। लेकिन बहुत ही जल्द 18 वर्ष से कम आयु वाले लोगों के लिए भी इसकी शुरुआत की जाएगी।

KYC के लिए किन्हें योग्य माना गया है?

वर्तमान प्रक्रिया के अनुसार KYC के लिए भारतीय निवासी, सभी भारतीय नागरिक जो 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के हैं उन्हें योग्य माना गया है। बहुत ही जल्द नाबालिकों एवं विदेशी निवासियों के लिए KYC शुरू होगा। कुछ समय में सभी के लिए यह अनिवार्य प्रक्रिया होगी। जिससे कई घटनाओं एवं दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा।

KYC के लिए मोबाइल नंबर का रोल:

KYC में मोबाइल नंबर का बहुत ही बड़ा रोल है। KYC के लिए एक ही मोबाइल नंबर प्रयोग किया जा सकता है। अगर आप अपना KYC वाला मोबाइल नंबर बदलना चाहते हैं तो आप कस्टमर केयर सेवा या इनके हेल्पलाइन नंबर पर फ़ोन करके उनसे सलाह ले सकते हैं।

KYC के लिए किसी प्रकार के भुगतान कि आवश्यकता है?:

केवाईसी के लिए किसी भी प्रकार के भुगतान की आवश्यकता नहीं होती। यह एक मुफ्त प्रक्रिया होती है। यह ग्राहक की पहचान के लिए एक आवश्यक है जिसमें शुल्क नहीं लिया जाता।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • एड्रेस एवं फोटो प्रूफ के अलावा भी प्रतिनिधि अधिकृत KYC एंड्रॉइड ऐप से आपकी एक फोटो भी लेगा। CERSAI और RBI दिशानिर्देशों के अनुसार कई विवरण देना होंगे जैसे माता-पिता और पति या पत्नी का नाम, आय से संबंधित जानकारी, व्यवसाय इत्यादि।
  • वर्तमान प्रक्रिया के अनुसार 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्ति ही KYC के योग्य हैं साथ ही वे व्यक्ति भारतीय नागरिक, भारतीय निवासी एवं भारत के कर निवासी होना चाहिए।
  • वॉलेट को अपग्रेड करने, सेविंग अकाउंट खोलने के लिए KYC का उपयोग किया जा सकता है।

KYC को पूरा करने के फायदे:

KYC को पूरा करने के कई फायदे हैं। आप वेरिफिकेशन या सत्यापन खुद जाकर करवा सकते हैं। KYC वेरिफाइड या सत्यापित ग्राहक बनने के लाभ इस प्रकार हैं:

  • वॉलेट में पैसे रखने की सीमा 10,000 से 1,00,000 में अपग्रेड कर सकते हैं।
  • वॉलेट अकाउंट से खर्च करने की कोई सीमा निर्धारित नहीं है।
  • अन्य वॉलेट या बैंक खाते में पैसे आसानीपूर्वक ट्रांसफर कर सकते हैं।
  • पेटीएम पेमेंट्स बैंक सेविंग्स अकाउंट भी खोल सकते हैं।

अभी e KYC की प्रक्रिया का भी बहुत चलन है। यह भी एक KYC ही है लेकिन यह इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के द्वारा की जाती है। इसमें लगने वाले दस्तावेज भी वही होते हैं बस उनकी स्कैन फोटो का प्रयोग किया जाता है। e KYC कागज रहित होती है और इसमें समय की भी बचत होती है।

KYC के स्टेप्स

किसी भी सेवा को प्राप्त करने या किसी कार्य को करने के लिए कुछ प्रोसेस होती हैं और उस प्रोसेस को पूरा करने के लिए कुछ स्टेप्स को पूरा करना होता है। ऐसे ही KYC की भी कुछ स्टेप्स हैं:

  • इसके लिए सबसे पहले आपको आवेदन करना होता है। उदहारण के लिए जैसे मोबाइल सिम लेने या बैंक अकाउंट खुलवाने के लिए आवेदन करना होता है। यह आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरीके से कर सकते हैं।
  • इसके बाद जिस कंपनी में आपने आवेदन किया है वह आपके द्वारा दी गयी जानकारी और दस्तावेजों के अनुसार आपकी पहचान को सत्यापित करती है। इन सभी जानकारी में आपका नाम, माता पिता या पत्नी का नाम, जन्मतिथि, एक एड्रेस फोटो प्रूफ एवं अपना पता देना होता है।
  • आपके द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार कंपनी या कोई बैंक आपका आधार नंबर UIDAI को भेजकर आपका पूरा विवरण माँगती है। UIDAI (Unique Identification Authority of India) वह संस्था है जो आधार नंबर देती है एवं उसका पूरा विवरण अपने पास रखती है।
  • बैंक या कंपनी UIDAI से आपकी पहचान की पुष्टि के लिए भी अनुरोध करती है। इसके लिए UIDAI आपके आधार नंबर के साथ जो मोबाइल नंबर जुड़ा होता है उसपर एक OTP भेजती है।
  • यह OTP आपको अपने सत्यापन के लिए उपयोग करना होता है। जैसे ही आप निर्धारित जगह पर OTP भर देते हैं तो आपका पूर्ण रूप से सत्यापन हो जाता है और आप उस सेवा को उपयोग कर सकते हैं। यह प्रक्रिया कुछ ही समय में पूर्ण हो जाती है।

आधार ईKYC के तरीके:

आधार ईKYC के दो बहुत ही महत्वपूर्ण तरीके हैं जिनके द्वारा किसी ग्राहक का KYC किया जा सकता है।

  • ओटीपी E-KYC की प्रक्रिया। OTP eKYC
  • बॉयोमीट्रिक KYC की प्रक्रिया । Biometric KYC

ओटीपी ईKYC की प्रक्रिया । OTP eKYC

यह एक बहुत ही आसान प्रक्रिया है जिससे ग्राहक के समय की भी बचत होती है और ग्राहक अपने घर बैठ कर आसानी से अपनी पहचान को सत्यापित कर सकता है।

  • सबसे पहले आप जिस सेवा के लिए खुद को सत्यापित करना चाहते हैं उस कंपनी को अपना आधार नंबर देना होता है।
  • इसके बाद आपके आधार कार्ड से लिंक हुए मोबाइल नंबर पर एक OTP आता है।
  • फॉर्म में एक निर्धारित जगह पर उस OTP को डालना होता है जैसे ही आप उस OTP को डालते हैं आपकी पहचान का सत्यापन हो जाता है।

बायोमेट्रिक आधार KYC

बायोमेट्रिक आधार KYC भी एक आसान प्रक्रिया है लेकिन इसके लिए आपको समय अधिक देना होता है।

  • Biometric verification की प्रक्रिया में ग्राहक को निर्धारित जगह पर स्वयं जाना होता है। Biometric device के माध्यम से अपने उंगुलियों के निशान को स्कैन करवाना होता है और साथ ही आँखों की पुतलियों को भी स्कैन करवाना होता है।
  • इसके बाद सरकार आपके द्वारा दिया गया विवरण का मिलान करते हैं अगर सभी लक्षण सामान होते हैं तो KYC पूर्ण हो जाता है। यहाँ उँगलियों के निशान को विशेष महत्व दिया जाता है।

KYC या E KYC दोनों में कौन सा है आसान तरीका?

अब बात आती है कि KYC ज्यादा अच्छा है या E KYC? वैसे देखा जाये तो eKYC  बहुत ही उम्दा विकल्प हैं इसके कई फायदे हैं जैसे:

कम समय में प्रक्रिया को पूरा होना:

इस e KYC एक सरल और अच्छी प्रक्रिया है इसमें ग्राहक कको कहीं बाहर नहीं जाना पड़ता। बल्कि ग्राहक घर पर बैठ कर ही KYC की प्रक्रिया को पूरा कर सकता है और बहुत ही कम समय में।

दस्तावेजों का काम नहीं होता:

इस प्रक्रिया में दतावेज़ों और कागजों के लिए भाग दौड़ नहीं करना होती। बस एक मोबाइल नंबर पर आने वाले OTP से ही आपका सत्यापन पूरा हो जाता है। किसी प्रकार के दस्तावेजों को हमेशा साथ नहीं रखना होता न ही किसी फोटोकॉपी को जमा करना होता है।

मुफ्त:

E KYC बिल्कुल मुफ्त होती है। जब आप KYC करवाते हैं तो उसके लिए कुछ न कुछ रूपये खर्च जरूर होते हैं जैसे फोटोकॉपी में, आने जाने में। लेकिन E KYC में इस प्रकार का कोई खर्च नहीं होता और ग्राहक को कहीं आना जाना भी नहीं पड़ता।

ऑटोफिल की सुविधा

यह एक बहुत ही अच्छा विकल्प है क्योंकि इसमें ग्राहक स्वयं ही अपनी जानकारी भर सकता है। जिससे की समय भी कम लगता है और ग्राहक को सुविधा भी अधिक रहती है। Normal KYC में ऐसा होना संभव नहीं है और इसकी वजह से कई बार गलतियाँ भी हो जाती हैं।

कम से कम गलतियां

जब E KYC किया जाता है तो ग्राहक खुद की जानकारी खुद भरता है इससे गलतियाँ होने की गुंजाईश कम होती है। साथ ही अगर कोई जानकारी गलत भर गयी है तो उसे तुरंत ही सही किया जा सकता है। गलती होने पर कोई कागज या एक फॉर्म बर्बाद नहीं होता।

फ़ोन, लैपटॉप या कंप्यूटर के द्वारा जानकारी दी जा सकती है 

इस E-KYC की प्रक्रिया में मोबाइल फ़ोन, कंप्यूटर या लैपटॉप का उपयोग करके अपनी जानकारी दी जा सकती है। और बहुत ही जल्दी ऑनलाइन फॉर्म भरा जा सकता है।

Tips

दोस्तों हमे उम्मीद है KYC क्या है? इसका Full Form क्या होता है (KYC Full Form In Hindi) आप ये सब जान गए होंगे, अगर आपके मन मे इसके अलावा और भी कुछ प्रश्न आते है तो आप कमेन्ट बॉक्स की मदद से पूछ सकते है।

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