IRDA क्या है? IRDA Full Form In Hindi

IRDA Full Form In Hindi – IRDA क्या है? आज के समय में कई बीमा कंपनी हैं और आपने सुना ही होगा कि बीमा करवाने के अनगिनत फायदे हैं। यहाँ IRDA भी Insurance से ही सम्बंधित है। आज हम इसी के बारे में यहाँ जानेंगे। वैसे तो कई बीमा कंपनी हैं जैसे LIC, BAJAJ, MAX etc। ये नामी ग्रामी Insurance Company हैं। वैसे हम यहाँ IRDA के बारे में बात करने जा रहे हैं। बीमा योजनायें देश के आर्थिक विकास में बहुत अहम् भूमिका निभाते हैं। लेकिन इसके साथ ही कई प्रकार के धोखे भी बीमा धारकों के साथ होते हैं। और उन्हीं सब मामलों का निपटारा करने के लिए IRDA सहयोग करता है। तो आईए जानते है IRDA का Full Form क्या होता है।

IRDA क्या है? IRDA Full Form In Hindi

what is the full form of irda

IRDA का पूरा नाम यानि Full Form है “Insurance Regulatory and Development Authority” या बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण। इसके द्वारा बीमा को विनियमित और बढ़ावा दिया जाता है यह एक स्वायत्त और वैधानिक निकाय होता है। यह एक ऐसी संस्था है जिसे बनाने का उद्देश्य था ‘आपके हितों की रक्षा करना’। इसके द्वारा बीमा सम्बंधित सभी क्रियाकलापों पर निगरानी राखी जाती है। और जितनी भी बीमा कंपनी हैं उन पर नियंत्रण रखा जाता है। साथ ही इनके विकास के लिए भी IRDA को कार्य करना होता है।

IRDA के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य

IRDA के बारे में कई ऐसे महत्वपूर्ण तथ्य हैं जिनके बारे में जानकारी होना चाहिए जैसे:

  • IRDA का पूरा नाम यानि Full Form “बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण” है।
  • IRDA के अध्यक्ष का नाम श्रीमान सुभाष चंद्र खुंटिया है।
  • IRDA शिकायत केंद्र का नंबर 1800 4254 732 है।
  • IRDA का मुख्य कार्यालय हैदराबाद है।
  • IRDA की शुरुआत 1999 में की गई थी।

IRDA का इतिहास

1818 में 19 वीं शताब्दी में भारत में जीवन बीमा के साथ बीमा की शुरुआत हुई थी। 1912 का भारतीय जीवन बीमा आश्वासन कंपनी अधिनियम भारत का पहला बीमा विनियमित करने वाला कानून था। जीवन बीमा राष्ट्रीयकरण के साथ जीवन बीमा निगम की स्थापना वर्ष 1956 में हुई थी। वहीं LIC को 1990 में पूर्ण एकाधिकार प्राप्त हुआ था। तब LIC को एक निजी बीमा क्षेत्र की कंपनी थी। 1850 में कोलकाता में ट्राइटन बीमा कंपनी भारत में प्राम्भ हुई थी। और उसी के दौरान औद्योगिक क्रांति का दौर था। 1907 में भारत में भारतीय मर्केंटाइल बीमा का गठन हुआ था। यह पहली ऐसी कंपनी थी जो सामान्य बीमा के सभी वर्गों को रेखांकित करने में सक्षम थी।

1991 तक भारत सरकार ने बीमा के क्षेत्र में आर्थिक सुधारों के लिए योजना बनाना शुरू कर दी थी। और इसी उद्देश्य के साथ 1993 में बीमा सुधार के लिए एक संस्था या समिति का गठन किया गया। इस समिति के अध्यक्ष श्रीमान आर. एन. मल्होत्रा (भारतीय रिज़र्व बैंक के सेवानिवृत्त गवर्नर) थे। इस समिति ने बीमा में कई सुधारों के लिए सिफारिश की, जैसे निजी बीमा कंपनियों को देश में बीमा के लिए बढ़ावा देना, घरेलू बीमा बाजार में विदेशी प्रवर्तकों को अनुमति प्रदान करना, सरकार के लिए एक स्वतंत्र नियामक निकाय का गठन होना इत्यादि।

1996 में बीमा नियामक प्राधिकरण नामक एक अंतरिम निकाय की स्थापना की गई। और वर्ष 1999 में IRDA अधिनियम को पारित किया गया। 19 अप्रैल 2000 को इसे स्वायत्तता का दर्जा मिला।

IRDA की संरचना

IRDA दस सदस्यीय एक निकाय है। इसके अंतर्गत निम्न शामिल हैं:

एक अध्यक्ष जिनकी आयु अधिकतम 60 वर्ष हो, पाँच पूर्णकालिक सदस्य जिनकी अधिकतम आयु 62 वर्ष हो, चार अंशकालिक सदस्य इत्यादि। इस प्रकार IRDA के सदस्यों को नियुक्त किया जाता है। इनका कार्यकाल पाँच वर्षों का होता है।

हटाने या कार्यालय से बर्खास्त

किसी सदस्य को हटाने या कार्यालय से बर्खास्त करने के भी नियम होते हैं जैसे:

अगर कोई सदस्य दिवालिया घोषित हो जाये।
अगर कोई सदस्य अपराधी घोषित किया गया हो।
अपने पद का जनता के हित के खिलाफ दुरूपयोग करने पर।
वित्तीय स्थिति को किसी कंपनी के अधिग्रहण करने पर।

इन मामलों के पुख्ता होने के बाद किसी भी सदस्य को बर्खास्त किया जा सकता है। अगर कोई भी सदस्य अपने पद से इस्तीफा देना चाहता है तो उसे भारत सरकार को तीन महीने पहले ही इसकी जानकारी देना होती है।

IRDA का उद्देश्य

कई बार बीमा में बीमा धारकों के साथ धोखे के मामले सामने आते हैं। बीमा धारकों के हित एवं उनके अधिकारों को बढावा देना IRDA का उद्देश्य है साथ ही बीमा उद्योग का विकास करना एवं इन पर निगरानी रखना और धोखाधड़ी के मामले को रोकना इसका उद्देश्य है। वास्तविक दावों को त्वरित करना एवं उनका निपटारा करना साथ ही किसी भी प्रकार की चूक को रोकना भी इसका अहम् उद्देश्य है। IRDA से बीमा का क्षेत्र Safe हो गया हैं एवं धोखाधड़ी के मामले भी कम हो गए है।

IRDA के कार्य और कर्तव्य

1999 के IRDA अधिनियम के अनुसार इसके कई कार्य और कर्तव्य हैं जैसे:

सभी बीमा कंपनियों के पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करना एवं उन्हें विनियमित करना।
बीमा धारकों के हितों की रक्षा करना।
एजेंटों की तरह ही बीमा मध्यस्थों को लाइसेंस प्रदान करना।
बीमा क्षेत्र के विकास के लिए इससे सम्बंधित सभी पेशेवर संगठनों को बढ़ावा देना और विनियमित करना।
पर्यवेक्षण प्रीमियम दरों और विनियमन और बीमा पॉलिसियों की शर्तें तैयार करना और उन्हें वितरित करना।
सॉल्वेंसी मार्जिन के रखरखाव का कार्य करना।
बीमा धारकों के साथ कोई धोखाधड़ी न हो इसका पूरा ध्यान रखना।

ये IRDA के महत्वपूर्ण कर्त्तव्य एवं कार्य हैं। इसकी वजह से बीमा के क्षेत्र में बहुत बदलाब आये हैं और बीमा क्षेत्र को काफी सुरक्षा मिली है।

परीक्षा

IRDA वह संस्था भी है जो बीमा एजेंट की परीक्षा का भी आयोजन करती है। जो भी व्यक्ति बीमा एजेंट बनना चाहते हैं वे IRDA की Official Website पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा में बैठने वालो की न्यूनतम योग्यता 12th होना अनिवार्य है।

अगर कोई भी व्यक्ति बीमा एगेंट बनना चाहता है तो उसे IRDA के द्वारा आयोजित परीक्षा को उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।

IRDA पोर्टल

IRDA का ग्राहकों एवं एजेंटों की सहायता के लिए ऑनलाइन Portal है। इस पोर्टल पर सभी प्रकार की जानकारी होती है जैसे बीमा के नियम, परीक्षा की जानकारी एवं अन्य।

IRDA बीमा नहीं बेचती लेकिन बीमा देने वाली कंपनी एवं बीमा धारकों की सहायता करती है। यह एक नियामक संस्था है।
इसकी वेबसाइट से बीमा के बारे में हर प्रकार की जानकारी हासिल की जा सकती है।
एजेंट की परीक्षा देने के लिए IRDA एजेंट पोर्टल पर पंजीकरण करना जरुरी होता है।

भारत की निजी बीमा कंपनी जिन्हें IRDA द्वारा विनियमित किया जाता है:

स्टार स्वास्थ्य बीमा
भारतीय जीवन बीमा निगम
रेलिगेयर स्वास्थ्य बीमा
निर्यात क्रेडिट गारंटी निगम लिमिटेड
श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लेफ्टिनेंट
फ्यूचर जनरली इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
एचडीएफसी-चब जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड।
बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
अपोलो म्यूनिख बीमा कंपनी लिमिटेड
चोलमंडलम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
भारती एक्सा जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
रहेजा क्यूबीई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड।

प्राधिकरण की विशेषताएँ

प्राधिकरण के अंतर्गत अध्यक्ष, पूर्ण कालीन सदस्य एवं अल्पकालीन सदस्य सभी शामिल होते हैं। ये सभी यहाँ एक समूह के रूप में कार्य करते हैं। इनमें से कोई भी व्यक्तिगत रूप से कार्य नहीं करता बल्कि सभी बीमा नियंत्रक की तरह एक साथ संयुक्त रूप से कार्य करते हैं। यदि कोई सदस्य इस्तीफा देता है या किसी की मृत्यु हो जाती है तो भी प्राधिकरण का कार्य निरंतर चलता रहता है। यहाँ मुकदमा शब्द का अर्थ है कि प्राधिकरण के द्वारा किसी भी व्यक्ति या फिर संगठन के खिलाफ मामला दर्ज करना या फिर इसके विपरीत कोई कार्यवाही करना।

पृष्ठभूमि

वैसे तो हमें IRDA का इतिहास देखा लें हम यहाँ इसकी पृष्ठभूमि पर भी एक नज़र डालेंगे जैसे:

1991: इस दौरान भारत सरकार द्वारा आर्थिक सुधार कार्यक्रम और वित्तीय क्षेत्र सुधार कार्यक्रम का प्रारंभ किया गया।
1993: बीमा क्षेत्र में सुधारों की सिफारिश के लिए श्री आर. एन. मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली समिति का गठन किया गया।
1994: मल्होत्रा ​​समिति ने कई प्रकार के सुधारों की सिफारिश पेश की जैसे निजी बीमा कंपनी को बढ़ावा देने की सिफारिश, विदेशी प्रोमोटरों को अनुमति देने की सिफारिश इत्यादि।

अब कई लोगों के मन में यह सवाल आ रहा होगा कि बीमा पॉलिसी क्या हैं और ये कैसे कार्य करती हैं इनका महत्व क्या है? तो हम जानेंगे की बीमा पॉलिसी क्या है।

बीमा पॉलिसी क्या है?

सीधे शब्दों में अगर देखा जाये तो बीमा एक ऐसा हथियार है जिससे भविष्य में होने वाले नुकसान से निपटा जा सकता है। कोई भी व्यक्ति यह नहीं जानता कि कल उसके जीवन में क्या होने वाला है। और बीमा पॉलिसी के द्वारा भविष्य के कुछ अनुमानित नुकसान से निपटा जाना संभव है। या कह सकते हैं उस नुकसान की भरपाई करना संभव है। Insurence या बीमा का मतलब ही होता है कि जोखिम से सुरक्षा। बीमा कई प्रकार का होता है।

बीमा के प्रकार

  • जीवन बीमा (Life Insurance)
  • साधारण बीमा (General Insurance)

जीवन बीमा (Life Insurance)

यह एक बहुत ही अहम् प्रकार का बीमा है इस बीमा को खरीदने वाले व्यक्ति की मृत्यु के बाद उस व्यक्ति पर आश्रित परिवार को बीमा कंपनी की तरफ से मुआवजा मिलता है। कई बार ऐसा होता है कि परिवार के मुखिया की आकस्मिक मृत्यु हो जाती है और उस व्यक्ति पर आश्रित उसका परिवार पैसे-पैसे के लिए परेशान हो जाता है। लेकिन अगर वो व्यक्ति जीवन बीमा करवाता है तो उसका परिवार इस आर्थिक संकट से बच जाता है और बीमा कंपनी उस परिवार को मुआवजा देती है, जिससे उस परिवार का खर्च चल सके।

साधारण बीमा (General Insurance)

साधारण बीमा में कई प्रकार के बीमा शामिल होते हैं जैसे पशु, वाहन, घर, फसल, स्वास्थ्य, फसल इत्यादि। अगर इनमें से किसी भी चीज़ का अपने बीमा करवाया है और इनमें से किन्हीं कारणों की वजह से इन्हें कोई नुकसान होता है तो उसका मुआवजा बीमा कंपनी देती है। लेकिन इसके लिए भी बीमा कंपनी के कुछ नियम और कानून होते हैं जिन्हें पढ़ लेना चाहिए।

बीमा की अवधि भी होती है उस अवधि के बाद बीमा को Renew करवाना होता है।

बीमा के फायदे

बीमा होने के कई फायदे हैं। दोनों ही बीमा के अपने अलग-अलग फायदे है जैसे:

जीवन बीमा में जिस व्यक्ति का बिम्मा होता है उस पर आश्रित परिवार या व्यक्ति को बीमा का पैसा मिलता है जिसे अन्य तरह से मुआवजा कहा जाता है जिससे उस व्यक्ति पर आश्रित परिवार को आजीविका चलने में परेशानी न हो।
साधारण बीमा में अगर अपने घर या वाहन या किसी अन्य चीज़ का बीमा करवाया है तो भी भविष्य में होने वाले नुकसान पर बीमा के पैसे मिलते हैं जिससे की उस नुकसान या आपदा से बाहर निकला जा सके।

बीमा बुरे वक्त की वो जमा पूंजी है जिससे सभी को एक बहुत बड़ी आस दिखाई देती है। लेकिन इसके बारे में व्यक्ति को पूरी जानकारी लेना चाहिए और अच्छी कंपनी से ही बीमा करवाना चाहिए एवं फर्जी कंपनी से बचना चाहिए। और इन्हीं सबके लिए IRDA है जो इन सभी फर्जी मामलों से निपटारा करवा सके। आप ऑनलाइन भी कई प्रकार की जानकारी IRDA के ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर प्राप्त कर सकते हैं।

बीमा प्लान

बीमा कंपनी कई प्रकार के प्लान देती हैं जिसमें बीमा करवाने पर बहुत लाभ मिलता है। कुछ प्लान इस प्रकार हैं जैसे:

पारंपरिक एनडावमेंट प्लान
यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप)
टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी

ऐसी ही कई प्लान कंपनी द्वारा निकाले जाते हैं सरकारी कंपनी और निजी बीमा कंपनी अपने-अपने अनुसार कई प्रकार के प्लान निकालती हैं और ग्राहकों को सुविधा प्रदान करती है। ग्राहक उनकी सहूलियत के अनुसार किसी भी बीमा प्लान को चुन सकता है। एजेंट के द्वारा हर प्लान को ग्राहक को समझाया जाता है जिससे कि ग्राहक को आगे जाकर किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े और कोई दिक्कत न हो। ग्राहक को अगर कोई बात समझ नहीं आती तो ग्राहक को पूरा अधिकार होता है कि वह बीमा के बारे में फिर से जानकारी ले।

Tips

IRDA इन सभी में एक अहम् भूमिका निभाता है। और अधिकांश सभी निजी एवं सरकारी बीमा कंपनी पर नियंत्रण करता है। हमे उम्मीद है आपको IRDA क्या है इसका Full Form (IRDA Full Form In Hindi) क्या होता है ये भी आपको पता चल गया होगा। अगर आपको ये जानकारी पसंद आई है तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना नया भूले।

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नमस्ते, मेरा नाम Samir है मै HFT का Co-Author & Founder हु मुझे हमेशा से नयी चीजे सिखने तथा उन्हे लोगो के साथ शेयर करना पसंद है. क्योकि मैं भी आपकी तरह ही हु. अगर आपको हमारा काम पसंद आता है तो हमे सोशल साईट पर फॉलो कर सकते है.

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