Income Tax क्या है? इनकम टैक्स को समझे आसान भाषा मे

Income Tax 2020 – देश और विदेश में कई प्रकार के Tax हैं और ऐसा ही एक है Income Tax, जो देश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है। ये जो भी नियम बनाये जाते हैं ये देश की प्रगति और नागरिकों की प्रगति के लिए ही बनाये जाते हैं।

देश के प्रति देश के नागरिकों की भी जिम्मेदारियाँ होती है और ये जिम्मेदारियाँ नागरिक Tax देकर ही पूरा करता है। जैसे घर चलाने के लिए पैसे की आवश्यकता होती है वैसे ही देश चलाने के लिए भी पैसे की आवश्यकता होती है। और यह पैसा Tax के रूप में नागरिकों से लिया जाता है।

कई बार लोगों को समझ नहीं आता कि Tax क्या होते हैं और इनका उद्देश्य क्या होता है। यहाँ हम बात करने जा रहे हैं Income Tax के बारे में। Income Tax क्या है और इसके क्या नियम है यह जानना बहुत जरुरी है।

Income Tax क्या है?

income tax kya hai

income tax या आयकर वह कर होता है जो सरकार द्वारा लोगों की वार्षिक आय पर लगाया जाता है। आयकर सरकारों के क्षेत्र में आने वाली सभी संस्थाओं द्वारा उत्त्पन्न वित्तीय आय पर लागू होता है। प्रत्येक व्यक्ति व्यवसाय कर देने के लिए पात्र होता है और कानून नियमों के अनुसार उन्हें हर साल Income Tax Return File करना अनिवार्य है। सरकार द्वारा Income Tax धन का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है। Income Tax से जो धन एकत्रित किया जाता है उसे सरकार देश की कई गतिविधियों एवं जनता की सेवा के लिए किये जाने वाले कार्यों में प्रयोग करती है।

Income Tax या आयकर के नियम

Income Tax या आयकर कानून को लागू करने वाले सभी उपबंद आयकर अधिनियम 1961 में लागू किये गए थे। भारत में भारत सरकार द्वारा लगाया जाने वाला यह कर प्रत्येक व्यक्ति पर लागू होता है। यह कर एक ख़ास आय सीमा के अंतर्गत आने वाले व्यक्तियों पर ही लगाया जाता है और उनके द्वारा इस आयकर को भरना अनिवार्य है।

उदहारण के लिए वित्तीय वर्ष 2019 -2020 के भारत के प्रवधानों के अनुसार पांच लाख रूपये से अधिक आय वाले व्यक्ति ही आयकर देने वालों की सूचि में आएंगे। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा तीन लाख रूपये रखी गयी है। एक ख़ास आय वालों के ऊपर  वाले व्यक्तियों को अतिरिक्त कर देना होता है। वर्तमान में जो व्यक्ति पचास लाख रूपये सालाना कमा रहा है उसे 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर देना होता है।

आय के प्रकार Types of Income

भारतीय आयकर अधिनियम 1961 में आय को मुख्यतः पाँच भागों में बाँटा गया है। इसकी गणना आयकर विभाग द्वारा की जाती है। आय के प्रकार इस तरह हैं:

पेशे से या व्यवसाय से होने वाली आय

इसके अन्तर्गत किसी भी कारोबार या पेशे से होने वाले लाभ, व्यापार के द्वारा प्राप्त किया गया ब्याज, साझेदारी के दौरान पार्टनर को मिला वेतन या बोनस सभी कुछ आता है।

वेतन के रूप में आय

इसके अंतर्गत कर्मचारी को मिलने वाला वेतन, ग्रेचुटी, पेंशन, एन्युटी,कमीशन, फीस, सालाना वृद्धि, प्रोविडेंट फण्ड में जमा होने वाली रकम और कर्मचारी कहते में जमा होने वाली रकम सभी कुछ शामिल है।

पूंजीगत लाभ के रूप में होने वाली आय

पूंजीगत लाभ के अंतर्गत वह आय आती है जैसे पूंजीगत संपत्ति की बिक्री से हुआ लाभ। इसमें शार्ट टर्म एवं लॉन्ग टर्म सभी प्रकार के लाभ आते हैं। इन्हें पूंजीगत लाभ के रूप में ही लिया जाता है।

मकान के किराये से होने वाली आय

स्वयं के स्वामित्व वाले मकान के किराये से होने वाली आमदनी को घरेलु सम्पत्ति से होने वाली आय माना जाता है। एक से अधिक मकान होने की स्थिति में अगर मकान खाली है या इसमें कोई किरायेदार नहीं है तो भी एक मकान को छोड़कर अन्य मकानों की अनुमानित आय आमदनी में जोड़ दी जाती है। या किराये से होने वाली आय कही जाती है।

अन्य स्त्रोत से होने वाली आय

बैंक डिपाजिट और सिक्योरिटी पर मिला ब्याज, शेयर पर मिला लाभ, रॉयलिटी, लॉटरी या कोई खेल से प्राप्त होने वाली आय या उपहार में जीती हुई रकम अन्य आय के स्त्रोत में आती है।

भारतीय आयकर विभाग

आयकर सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष कर है इसमें एक व्यक्ति, हिन्दू अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों का समूह, एक फर्म या एक कंपनी सभी कुछ शामिल होते हैं। भारत के आयकर अधिनियम को कई भागों में बाँटा गया है।

  • आयकर अधिनियम 1961
  • वित्त अधिनियम (Finance Act)
  • आयकर नियमावली (Income Tax Rules)
  • परिपत्र/अधिसूचना (Circulars and Notification)
  • न्यायालय के विधायी नियम (Case Low)

आयकर अधिनियम

भारत में आयकर अधिनियम 1961 में लाया गया था जो सर्वप्रथम 1 अप्रैल 1962 में अस्तित्व में आया। इस अधिनियम में कुल 298 धाराएँ एवं 14 अनुसूचियाँ थी। प्रतिवर्ष संसद द्वारा पारित वित्तीय अधिनियम में परिवर्तन होते रहते हैं। आयकर अधिनियम 1961 को सही प्रकार से लागू और संचालित करने के लिए अधिकारीयों को विशेष अधिकार दिए गए हैं।

वित्तीय अधिनियम

प्रतिवर्ष वित्तमंत्री द्वारा संसद में आय व्यय का लेखा जोखा प्रस्तुत किया जाता है। इसे दो भागों में बाँटा गया है भाग A एवं भाग B। भाग A में सरकार के वित्तीय क्षेत्र में प्रस्तावित नीतियों को दर्शाते हैं वहीँ भाग B में प्रस्तावित कर बजट के बारे में बताया जाता है। इसे लागू करने के लिए संसद में वित्तीय विधेयक प्रस्तुत किया जाता है। संसद से स्वीकृति मिलने के पश्चात राष्ट्रपति से सहमति ली जाती है। राष्ट्रपति की सहमति मिलने पर इसे लागू किया जाता है।

वित्त अधिनियम की सूचि के अनुसार चार भागों में दरें निर्धारित की जाती हैं।

पहला भाग

इसमें चालू निर्धारण वर्ष में लागू कर की दरें शामिल होती हैं।

दूसरा भाग

इसमें चालू वित्त वर्ष में TDS (Tax Deduction At Source) की दरें शामिल होती हैं।

तीसरा भाग

इसमें वेतन शीर्षक की आय से आयकर की कटौती की गणना एवं अग्रिम कर की गणना की दरें आती हैं।

चौथा भाग

इसमें शुद्ध कृषि आय की गणना सम्बन्धी नियम आते हैं।

आयकर नियमावली

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा ही प्रत्यक्ष कर का प्रशासनिक कार्य किया जाता है। अधिनियम के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए केंद्रीय कर बोर्ड को नियम का अधिकार प्राप्त है। CBDT समय-समय पर आयकर प्रशासन नियमावली तैयार करता है। इन नियमों को आयकर नियमावली 1962 ही कहा जाता है।

परिपत्र और अधिसूचनाएं

विशेष समस्याओं से निदान, प्रावधानों का अर्थ एवं शस्त्र सम्बन्धी सन्देश को दूर करने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा समय-समय पर परिपत्र जारी किये जाते हैं। इन परिपत्रों का पालन करना विभाग के लिए अनिवार्य होता है। जबकि करदाताओं के लिए  यह अनिवार्य नहीं होता है। करदाता अपने हित में लाभ पहुँचाने वाले परिपत्रों का पालन कर सकता है। अधिनियमों के प्रावधानों को लागू करने के लिए अधिसूचनाओं का निर्गमन केंद्रीय सरकार द्वारा किया जाता है।

न्यायिक निर्णय

सर्वोच्च न्यायलय इस देश की सर्वोच्च न्यायिक सत्ता है और इसके द्वारा बनाये गए नियम और दिशा निर्देश को भी सर्वोच्च माना जाता है। संसद के लिए यह संभव नहीं है कि इस अधिनियम में आने वाली समस्याओं का पूर्वानुमान करके निदान बता दें, अतः करदाता और विभाग के बीच होने वाले विवादों का निदान न्यायलय द्वारा किया जाता है।

Income Tax Return File कैसे किया जाता है

Income Tax Return File करने से तात्पर्य है कि सरकार को अपनी आय के बारे में जानकारी देना। और इसे सही प्रकार से भरना चाहिए क्योंकि आपकी एक छोटी सी गलती आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकती है। Income Tax Return File करने का तरीका

  • सबसे पहले आप इस वेबसाइट को Open कीजिये https://www.incometaxindiaefiling.gov.in/
  • यहाँ पर आपको Login Section पर क्लिक करना है।
  • इसके बाद आप यहाँ पूछे अनुसार अपना पैन नंबर, Password, जन्मतिथि और Captcha Code डालें।
  • अब Login पर क्लिक कीजिये जैसे ही आप लॉग इन होंगे आपके सामने Income Tax e-filling का होम पेज आ जायेगा।
  • इसमें आपको Income Tax E-Filling का Option चुनना है। और Income Tax Return को Select करना है। ऐसा करते ही आपके विंडो पर एक नया स्क्रीन खुलेगा।
  • यहाँ आपका पैन नंबर पहले से डला होगा। आपको इसमें ड्रॉप डाउन मैन्यु में असेसमेंट ईयर चुनना होता है।
  • इसके बॉस ITR फॉर्म चुनिए। जो की अलग-अलग विभाग में विभाजित किये गए हैं।
  • इसके बाद यह फॉर्म भरें और इसे Submit करें।
  • इसे Submit करने के लिए आप मोड चुन सकते हैं जैसे Prepare या Submit Online।
  • आपको यहाँ यह भी चुनना होगा कि कैसे आपको अपने ITR को Verify करना है। इसके भी दो तरीके हैं आधार या Net Banking।
  • इसके अलावा आप ITR बंगलुरु में स्थित Central Processing Unit का  भी प्रयोग इसके लिए कर सकते हैं।
  • ITR फॉर्म को आप दी गई किसी भी भाषा में भर सकते हैं। जैसे Hindi या English।
  • एक बार इसे Submit करने के बाद आपको इसके संन्य दिशा निर्देश ध्यानपूर्वक पढना है।
  • इसके बाद दायीं तरफ बने टिक मार्क पर क्लिक करना है। इसके बाद आपके ITR की Online Filling की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

ITR Filling के चरण

ITR Filling के सात चरण होते हैं जैसे-

  • सामान्य निर्देश
  • आय की जानकारी
  • छूट का विवरण
  • आयकर का Calculation
  • TDS और अन्य चुकाए गए Tax की जानकारी
  • बैंक का विवरण
  • Verification

आयकर भरते समय ध्यान रहने योग्य बातें

अगर आपकी सालाना आमदनी 2.5 लाख से अधिक है तो आपके लिए आयकर भरना जरुरी है। ITR भरने के लिए जरुरी है कि ITR बचत और जरुरी खर्च सम्बन्धी सभी कटौती के बाद Tax योग्य आय की गणना करें। Income Tax कानून के हिसाब से विभिन्न Section के तहत मान्य कटौतियों का लाभ उठाकर आप अपना आयकर चुकाने से तो बच सकते हैं। लेकिन आयकर भरना आपके लिए तब भी जरुरी है। जब आप ITR भरने के लिए CA के पास जाते हैं लेकिन एक बात का ध्यान रखें कि ITR से बचने के लिए नकली CA से भी बचना जरुरी है। आपको अपने सभी जरुरी दस्तावेज तैयार रखना चाहिए। Tax बचने का चक्कर में कई लोग गलत जानकारी भर देते हैं और भविष्य में उन्हें इसका भुगतान करना पड़ता है। ITR आपको एक निर्धारित सीमा के अन्दर भर देना चाहिए। नहीं तो इसकी आपको भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

ITR भरने के फायदे

  • ITR भरने के कई फायदे हैं। इसलिए ITR भरना चाहिए।
  • ITR भरने से बैंक लोन में आसानी होती है साथ ही क्रेडिट कार्ड लेने में भी आसानी होती है।
  • अगर आप कोई नया व्यापार करना चाहते हैं तो उसके लिए भी ITR भरने से सहायता मिलती है।
  • भविष्य में होने होने वाले नुकसान से भी ITR के द्वारा बचा जा सकता है।
  • अगर भविष्य में आप कोई बड़ा लेन देन करते हैं या फिर Property में Invest करते हैं, या बेचते हैं, Mutual Fund या बैंक में बड़ी रकम जमा करते हैं। ऐसा करने पर Income Tax की तरफ से कोई बड़ा Notice नहीं आता।
  • ITR आपकी आय पता करने का सबसे सही तरीका होता है इसलिए जब भी आप बीमा करवाते हैं तो आपको ज्यादा बीमा मिलने की सम्भावना होती है।
  • वीजा के लिए कई बार पिछले दो साल के ITR की जरुरत होती है। अगर आपके भरे हुए ITR की जानकारी है तो आपको वीजा मिलना आसान हो जाता है।
  • अगर आप Work From Home करते हैं या फिर Freelancer हैं तो इस स्थिति में आपको ITR नहीं देना होता लेकिन आपको आमदनी देने वाला TDS कट सकता है और आप ITR द्वारा TDS Return ले सकते हैं।
  • ITR आपके निवास का पक्का प्रमाण होता है। जिसे आप किसी भी सरकारी काम में या Documents बनवाने में एड्रेस प्रूफ के रूप में उपयोग कर सकते हैं।
  • समय पर ITR भरने से आपको किसी भी प्रकार की पैनालिटी या ब्याज नहीं देना होता।

ITR नहीं भरने से होने वाले नुकसान

जैसे ITR भरने के फायदे हैं वैसे ही ITR न भरने के नुकसान भी हैं। अगर आप किसी कंपनी में कार्य करते हैं और  आपकी आमदनी ज्यादा नहीं है तो आप ये सोच लेते हैं कि अगर में ITR नहीं भी भरूं तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन ऐसा सोचना गलत है इससे देश को हानि होने के साथ-साथ आपको भी हानि होगी। ITR की कॉपी आपको कई जगह दिखाना अनिवार्य हो गया है इसलिए ITR न भरने के कई नुकसान आपको भुगतना पड़ सकते हैं।

नमस्ते, मेरा नाम Samir है मै HFT का Co-Author & Founder हु मुझे हमेशा से नयी चीजे सिखने तथा उन्हे लोगो के साथ शेयर करना पसंद है. क्योकि मैं भी आपकी तरह ही हु. अगर आपको हमारा काम पसंद आता है तो हमे सोशल साईट पर फॉलो कर सकते है.

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