DRDO Full Form In Hindi – DRDO क्या है व DRDO का इतिहास!

DRDO Full Form In Hindi – What is the full form of DRDO, ये तो सभी जानते हैं कि देश की रक्षा के लिए सेनाओं को तैनात किया जाता है और यह उनकी प्रमुख जिम्मेदारी होती है । लेकिन कभी किसी ने ये सोचा है कि सेना के लिए आधुनिक हथियारों का निर्माण कहाँ होता है इसके लिए भी कोई संस्था है या नहीं। शायद बहुत ही कम लोगों ने इस बात आर ध्यान दिया होगा। तो आज हम यहाँ ऐसे ही एक अनुसन्धान के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसका नाम है DRDO। तो हम यहाँ ये जानेंगे कि DRDO क्या है यह कैसे कार्य करता है एवं और भी बहुत कुछ।

DRDO क्या है? DRDO Full Form In Hindi

what is the full form of drdo in hindi

DRDO का पूरा नाम यानि Full Form है “Defence Research And Development Organisation” जिसे हिंदी में “रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन” के नाम से जाना जाता है। वैसे तो DRDO के बारे में सभी ने सुना होगा लेकिन इसके कार्यों से शायद कम ही लोग अवगत होंगे। तो DRDO एक ऐसा भारतीय संगठन है जो देश की रक्षा से जुड़े हुए सभी कार्यों का प्रबंध देखता है। DRDO भारतीय रक्षा मंत्रालय की रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग  के तहत कार्य करता है एवं यह भारत की रक्षा प्रणाली के विकास के लिए एवं Design के लिए हमेशा लगातार कार्यरत है।

ये तो सभी जानते हैं कि भारत में तीन रक्षा सेनायें हैं जल, थल एवं वायु। तो DRDO के द्वारा भारत की तीनों सेनाओं के लिए उनकी आवश्यकता के अनुसार विश्व स्तर के हथियारों एवं उपकरणों को बनाने के कार्य किया जाता है। जैसे Aircraft, Weapons, इंजीनियरिंग सिस्टम, लड़ाई के उपयोग किये जाने वाले वाहनों, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स इंस्ट्रूमेंटेशन, नौसेना सिस्टम, विशेष सामग्री,  एडवांस कंप्यूटिंग और जीवन विज्ञान इत्यादि।

DRDO के द्वारा भारत को विश्व स्तर पर विज्ञान और प्रौद्योगिकीय आधार स्थापित करके समृद्ध बनाया जाता है। साथ ही देश की सेनाओं को प्रतिस्पर्धी प्रणालियों और समाधानों से लेस करवाया जाता है। यह देश के सैनिकों की युद्ध शक्ति को बढ़ावा देने में सहायता प्रदान करता है। साथ ही रक्षा सेवाओं को तकनीकी संसाधन भी प्रदान करता है।

DRDO का इतिहास

DRDO का Full Form तो आप जान ही गए चलिए अब इसका इतिहास जानते है। डीआरडीओ की स्थापना 1958 में हुई थी। और उस समय भारत 70% Defence Items देश के बाहर से खरीदता था। लेकिन इसकी स्थापना के बाद भी कोई ज्यादा फर्क देखने के लिए नहीं मिला उस समय इस संगठन में 10 प्रतिष्ठानों और प्रयोगशाला को शामिल किया गया था। लेकिन कुछ सालों के बाद DRDO ने अपने कार्यों और कई विषय शिक्षणों, प्रयोगशालाओं और उपलब्धियों में विकास किया।

आज अगर देखा जाये तो DRDO की लगभग 50 से अधिक प्रयोगशालाएं कार्यरत है । इन प्रयोगशालाओं में कई Technologies का विकास होता है जैसे हथियार, विमान, युद्ध वाहन, इंस्ट्रूमेंटेशन, इंजीनियरिंग सिस्टम, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, विशेष सामग्री,  एडवांस कंप्यूटिंग, नौसेना सिस्टम और जीवन विज्ञान, इनफार्मेशन सिस्टम और कृषि को सुरक्षा देने वाली रक्षा तकनीक इत्यादि।

DRDO में वर्तमान में लगभग  5 हजार से अधिक वैज्ञानिक कार्यरत हैं इनके अलावा 25 हजार अन्य वैज्ञानिक तकनीकी  एवं समर्थन के कर्मियों के रूप में कार्यरत हैं। DRDO का मुख्यालय भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है।

DRDO में भर्ती कैसे होती है?

कई लोग अब ये जानना चाहते होंगे कि DRDO में भर्ती कैसे होती है। तो इसके लिए परीक्षा आयोजित की जाती है। और इस परीक्षा में भाग लेकर एवं इसका एग्जाम पास करके आप साइंटिस्ट बन सकते हैं। GATE, SET और CEPTAM का एग्जाम पास करके भी साइंटिस्ट बना जा सकता है।

GATE

चलिए जानते हैं कि GATE आखिर क्या है? GATE का पूरा नाम है Graduate Aptitude Test In Engineering। यह एग्जाम इंजीनियरिंग के छात्रों द्वारा दिया जाता है और यह साइंटिस्ट बनने में कैसे सहायक है। अगर किसी उम्मीदवार का GATE का एग्जाम Clear होता है तो DRDO द्वारा उस उम्मीदवार की प्राप्त अंकों के माध्यम से साइंटिस्ट ‘B’ की भर्ती की जाती है। जो भी उम्मीदवार DRDO में साइंटिस्ट बनना चाहते हैं  DRDO के Application Form को GATE के माध्यम से भरें। जिन उम्मीदवारों को Shortlist किया जाता है वे Personal Interview के लिए आगे बढ़ते हैं।

CEPTAM

CEPTAM के माध्यम से भी DRDO में भर्ती की जाती है और इसके द्वारा आवेदन किया जाता है। इसकी परीक्षा भी लिखित में होती है। जिसके अंतर्गत दो परीक्षाएं होती हैं टियर-1 और टियर-2। जो भी छात्र टियर-1 की परीक्षा को पास कर लेते हैं वह टियर-2 की परीक्षा में बैठते हैं। टियर-1 के अंतर्गत 150 Marks के Objective Question पूछे जाते हैं। इनके लिए 2 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। वहीं टियर-2 की परीक्षा में Marks के Objective Question दिए जाते हैं Solve करना होता है। और इसके लिए 1 घटे और 30 मिनिट का समय निर्धारित किया गया है।

DRDO के लिए टियर1 का सिलेबस

अब बात आती है कि DRDO के सिलेबस में क्या-क्या है जिसे पढने से DRDO की परीक्षा पास की जा सकती है। तो देखते हैं DRDO का सिलेबस

  • Quantitative Ability/Aptitude
  • General Intelligence & Reasoning Ability
  • General Awareness
  • English Language (Basic Knowledge)
  • General Science

DRDO के लिए टियर2 का सिलेबस

Test Specific to the Subject of Post Code। इसे Specific किया गया जो Post होगी उसके अनुसार ही इसका सिलेबस होगा।

SET (Scientist Entry Test)

DRDO की परीक्षा दो चरणों में संपन्न होती है। पहला लिखित परीक्षा एवं दूसरा Interview। इसके अंतर्गत उम्मीदवार का Selection उसकी Performance पर आधारित होता है एवं यह परीक्षा 3 घटे की होती है। एवं इसके अंतर्गत 500 अंकों के 150 Objective Type Question पूछे जाते है।

Section A

BE, B.Tech, M.Sc सिलेबस के विषय के अनुसार ही कुल 400 अंकों में से 4 अंक के 100 प्रश्न पूछे जाते है।

Section B

इसमें 2 अंकों के 50 प्रश्न पूछे जाते हैं है, जो कुल 100 अंक के होते है एवं इसमें Logical Reasoning, Spatial Reasoning, Concept Formation, Abstract Reasoning और Numerical Reasoning के प्रश्न पूछे जाते हैं।

DRDO के लिए योग्यताएँ

अब ये जानना भी बहुत जरुरी है कि DRDO के लिए क्या योग्यताएँ होनी चाहिए।

शिक्षा

जो भी व्यक्ति DRDO में रूचि रख रहा है और इसके लिए आवेदन करना चाहता है तो उसके पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/संस्थान से Engineering And Technology की बेचलर डिग्री होना चाहिए। इसके साथ ही उसने Science, Maths, Psychology में कम से कम 60% अंकों से Master Degree की हुई होना चाहिए।

उम्र

DRDO के लिए जो लोग आवेदन करना चाहते हैं उनकी उम्र 18 से 28 वर्ष के बीच होनी चाहिये लेकिन कुछ अरक्षित वर्गों को इसमें छूट दी गई है।

DRDO की परीक्षा कब होती है?

DRDO की परीक्षा के बारे में अगर आप पता करना चाहते हैं तो आप इसकी Official Website पर जाकर पता कर सकते हैं।

DRDO के कार्यक्षेत्र

  • परियाजनाओं/प्रस्तावों की समीक्षा
  • आवश्यकता का अनुमोदन
  • बोर्डों का आयोजन करना/शामिल होना
  • अनुमोदन के लिए प्रसंस्करण कार्य
  • कार्यों के प्रगति की निगरानी करना
  • बजट का निर्धारण और नियंत्रण
  • भूमि अधिग्रहण एस्टेट प्रबंधन
  • निति निर्धारण
  • भविष्य की परियोजनाओं की योजना बनाना
  • गुणवत्ता की गारंटी
  • डेटाबेस को बनाये रखना
  • सेमिनारों और संगोष्ठियों का आयोजन करना

DRDO का दृष्टिकोण

DRDO की स्थापना इसलिए की गई थी कि देश को विश्व-स्तरीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकीय आधार स्थापित करके समृद्ध बनाया जा सके एवं देश की तीनों सेनाओं को अंतर्राष्ट्रीय रूप से प्रतिस्पर्धी प्रणालियों और समाधानों से लेस किया जा सके। जिसमें DRDO ने कामयाबी हांसिल की।

DRDO द्वारा विकसित मिसाइल

अग्निI

अग्नि-I की ऊंचाई 15 मी. है। एक चरण से युक्त, ठोस ईंधन चालित मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। अग्नि-I की मारक क्षमता 700-800 किमी. है।

अग्निII

अग्नि-II मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है एवं इसकी मारक क्षमता 2000-3000 किमी. है।

अग्निIII

अग्नि-III की इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है एवं इसकी मारक क्षमता 3000-5500 किमी. है।

अग्निV

अग्नि-V भारत की अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है एवं इसकी मारक क्षमता 5000-6000 किमी. है।

पृथ्वीI (SS-150)

पृथ्वी-I (SS-150) थल सेना संस्करण की मारक क्षमता 150 किमी. है एवं इसकी पेलोड क्षमता 1000 किग्रा. है।

पृथ्वीII (SS-250)

पृथ्वी-II (SS-250) वायु सेना संस्करण की मारक क्षमता 250 किमी. है एवं इसकी पेलोड क्षमता 500 किग्रा. है।

धनुष (SS-350)

धनुष (SS-350) पृथ्वी- III का नौसैनिक संस्करण  है। धनुष (SS-350) को जहाज से छोड़ा जा सकता है। धनुष (SS-350) की मारक क्षमता 350 किमी. है। धनुष (SS-350) 500 किग्रा. तक के परंपरागत और नाभिकीय वारहेड (warhead) को अपने साथ ले जाने में सक्षम है।

अस्त्र

अस्त्र एक दृश्य सीमा से परे हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। इस मिसाइल सुपरसोनिक गति से शत्रु के विमान को बीच में ही रोकने की क्षमता है। अस्त्र मारक क्षमता Head-On Mode में 80 किमी. और Tail-Chase Mode में 20 किमी. है।

त्रिशूल

त्रिशूल निम्न दूरी की त्वरित प्रतिक्रिया युक्त, प्रत्येक मौसमों में धरातल से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। इसका विकास कम ऊँचाई वाले हमलों से सुरक्षा के लिए किया है। त्रिशूल की मारक क्षमता 9 किमी. है।

आकाश

आकाश मध्यम दूरी की धरातल से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। आकाश 18000 मी. की ऊँचाई पर लक्ष्य को 30 किमी. की दूरी से ही भेदने में सक्षम है। आकाश 50 किग्रा. वजन तक के पेलोड को अपने साथ ले जाने में सक्षम है।

ब्रह्मोस

ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे पनडुब्बियों, पानी के जहाजों, हवाई जहाजों या भूमि कहीं से भी छोड़ा जाना संभव है। यह भारत के DRDO एवं रूस के NPO माशीनोस्ट्रोयेनिया (Mashinostroeyenia) का संयुक्त उद्यम है। दोनों संगठनों ‘ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड’ की स्थापना की गई। रूस की ‘मास्कोवा’ और भारत की ‘ब्रह्मपुत्र’ नदी के नाम को जोड़कर इस मिसाइल का नाम ‘ब्रह्मोस’ रखा गया है। ब्रह्मोस की मारक क्षमता 290 किमी. और गति 2.8 मैक है।

नाग

नाग मिसाइल टैंक रोधी मिसाइल है,  यह ‘दागो और भूल जाओ’ के सिद्धान्त पर कार्य करती है। नाग मिसाइल के धरातलीय संस्करण की मारक क्षमता 4-6 किमी. है एवं नाग की वायु संस्करण की मारक क्षमता 7-8 किमी. है।  नाग 42 किग्रा. वजन वाली मिसाइल है जो 230 मी./से. की गति से उड़ सकती है।

सागरिका

सागरिका एक नाभिकीय क्षमता से युक्त पनडुब्बी से धरतलीय (submarine to surface ) बैलिस्टिक मिसाइल है। सागरिका लगभग 6.5 मी. लंबी है और इसका वजन 7 टन है। सागरिका की मारक क्षमता 750 किमी. है और सागरिका 500 किग्रा. तक के पेलोड (payload ) को अपने साथ ले जाने में सक्षम है।

शौर्य

शौर्य DRDO द्वारा एक विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल है। शौर्य को कनस्तर (canister) से प्रक्षेपित किया जाता है। शौर्य की मारक क्षमता 750-1900 किमी. है। पृथ्वी और अग्नि के विपरीत शौर्य कप भूमिगत साइलो (silos) से भी छोड़ा जाना सम्भव है। शौर्य एक टन भार के परंपरागत और नाभिकीय हथियारों को अपने साथ ले जा सकती है। शौर्य मिसाइल ने देश को जरूरी द्वितीय प्रहार क्षमता (Second Strike Capability) प्रदान की है।

निर्भय

निर्भय विकासधीन लंबी दूरी की सबसोनिक क्रूज मिसाइल है। निर्भय की मारक क्षमता 1000 किमी. और गति 0.7 मैक है। तो ये सभी DRDO द्वारा विकसित मिसाइल थी जिन्होंने देश की रक्षा में समर्थन प्रदान किया। DRDO ने दिनोदिन देश को तरक्की के मार्ग पर प्रदर्शित किया है जो भारत के लिए गर्व की और सौभाग्य की बात है।

DRDO एक ऐसा संगठन है जिसने भारत की तीनों सेनाओं को बहुत सहूलियत प्रदान की है एवं जरुरत के अनुसार हथियरों और तकनीक से सेनाओं को लेस कराया है। जब देश में DRDO नहीं था उस समय भारत को 70% तक डिफेंस Item बाहरी देशों से खरीदने पड़ते थे। इससे हमारा देश दूसरे देशों पर निर्भर हो गया था। ऐसे में भारत को शक्तिशाली देश नहीं कहा जा सकता था। जब DRDO की स्थापना हुई उस समय भी अन्य देशों से ही ये Item खरीदे जाते थे।

लेकिन DRDO के आने के कुछ समय बाद देश में बड़े पैमाने पर परिवर्तन आये हालाँकि ये परिवर्तन आने में थोडा समय लगा। और आज हम देख सकते हैं कि DRDO और देश के और भी संगठन जैसे ISRO ने किस प्रकार देश को अपने कार्य से प्रकाशित किया है। DRDO ने कई चुनौतियों का सामना किया लेकिन पीछे नहीं हटा और देश को कई मिसाइल दी और आगे भी ऐसे ही विकसित होते रहेंगे।

Tips

हमे उम्मीद है आपको DRDO क्या है इसका Full Form क्या होता है आदि चीजों से जुड़ी ये पोस्ट जानकारी से परिपूर्ण लगा होगी अगर आपको ये पोस्ट पसंद आया है तो इसे अपने दोस्तों व रिश्तेदारों के साथ शेयर करना नया भूले!

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नमस्ते, मेरा नाम Samir है मै HFT का Co-Author & Founder हु मुझे हमेशा से नयी चीजे सिखने तथा उन्हे लोगो के साथ शेयर करना पसंद है. क्योकि मैं भी आपकी तरह ही हु. अगर आपको हमारा काम पसंद आता है तो हमे सोशल साईट पर फॉलो कर सकते है.

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